★ जय श्री राम! आपका दिन मंगलमय हो।
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लक्ष्मी माता

श्री लक्ष्मी चालीसा दोहा

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मातु लक्ष्मी करुणामयी, सुन लो मेरी बात।
धन, धान्य और सुख प्रदान, रखो सदा तुम साथ॥
जय-जय लक्ष्मी जगत जननी।
भक्तों की तुम हो हितकरनी॥
विष्णु प्रिया वैकुण्ठ निवासी।
करुणा बरसाओ अविनाशी॥
कमलासन पर सदा विराजो।
भक्तों के मन में तुम राजो॥
चार भुजाओं में शोभा पाती।
शंख, पद्म, अमृत बरसाती॥
दीन-दुखी की लाज बचाओ।
सुख-समृद्धि घर-घर लाओ॥
शुक्रवार जो व्रत अपनावे।
माँ लक्ष्मी की कृपा वह पावे॥
दीप जलाकर जो गुण गावे।
मनचाहा वरदान वह पावे॥
निर्धन को धनवान बनाती।
भटके जन को राह दिखाती॥
सच्चे मन से जो ध्याता है।
सुख-वैभव वह पाता है॥
रोग, शोक सब दूर भगाओ।
प्रेम, शांति का दीप जलाओ॥
संतोष और सद्बुद्धि देना।
सदा धर्म के पथ पर लेना॥
दोहा
लक्ष्मी चालीसा जो पढ़े, श्रद्धा सहित मन लाय।
माँ की कृपा से घर-आँगन, सुख-समृद्धि भर जाय॥
लक्ष्मी मंत्र
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः।